नवरात्र में तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा देवी की पूजा

चैत्र नवरात्र की दूसरी महाशक्ति हैं-चंद्रघँटा देवी। देवासुर संग्राम में देवी भगवती ने घंटे की नाद से ही असुरों का संहार कर दिया था। इनके शीश पर चंद्रमा भी विराजमान है। वह शांति की देवी हैं। मानसिक शांति प्रदान करती हैं। देवी सूक्तम का पाठ करना इनकी पूजा का विधान है। इसके साथ ही, भगवान शंकर के मंत्रों...ऊं नम: शिवाय के संपुट केसाथ ही देवी भगवती चंद्रघंटा की आराधना करनी चाहिए। यह मानसिक बल की प्रतीक हैं।